गोंडवाना राजचिह्न पर माल्यार्पण, ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार की उठी मांग
इस अवसर पर विजय गोंड ने कहा कि गोंडवाना राज्य का विस्तार विंध्य, कैमूर और बुंदेलखंड की पहाड़ियों तक फैला हुआ था। चंदौली जनपद, जो विंध्य क्षेत्र से सटा है तथा बिहार और झारखंड की सीमाओं से जुड़ा है, आदिवासी समाज की बहुलता वाला क्षेत्र रहा है। उन्होंने बताया कि नौगढ़ क्षेत्र में गोंड राजाओं द्वारा स्थापित किला आज विलुप्त होने के कगार पर है, जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है।
शहाबगंज, चंदौली

7:36 PM, Apr 20, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्सचकिया, चंदौली। आदिवासी नेता एवं अधिवक्ता विजय गोंड, बॉर्डर प्रदेश उपाध्यक्ष समाजवादी अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ के नेतृत्व में सोमवार को चकिया तहसील क्षेत्र में गोंडवाना की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां काली पोखरा से हुई, जहां से विकास खंड चकिया नगर भ्रमण करते हुए जुलूस वन विश्राम गृह प्रांगण, चकिया पहुंचा। यहां आदिवासी गोंड राजाओं द्वारा स्थापित गोंडवाना के राजचिह्न हाथी के ऊपर शेर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धा व्यक्त की गई।
इस अवसर पर विजय गोंड ने कहा कि गोंडवाना राज्य का विस्तार विंध्य, कैमूर और बुंदेलखंड की पहाड़ियों तक फैला हुआ था। चंदौली जनपद, जो विंध्य क्षेत्र से सटा है तथा बिहार और झारखंड की सीमाओं से जुड़ा है, आदिवासी समाज की बहुलता वाला क्षेत्र रहा है। उन्होंने बताया कि नौगढ़ क्षेत्र में गोंड राजाओं द्वारा स्थापित किला आज विलुप्त होने के कगार पर है, जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है।
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उन्होंने कहा कि चकिया के दिलकुशा वन विश्राम गृह स्थित गोंडवाना का राजचिह्न इस गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रमाण है। आदिवासी समाज लंबे समय से इस धरोहर के संरक्षण, सुरक्षा और जीर्णोद्धार की मांग करता आ रहा है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस ऐतिहासिक धरोहर पर माल्यार्पण कर गर्व की अनुभूति व्यक्त की।
कार्यक्रम में राजचिह्न खोजकर्ता संतोष गोंड सहित त्रिलोकी पासवान, सी.पी. खरवार, टोनी खरवार, रमापति गोंड, कांता गोंड, दिनेश गोंड, पन्ना गोंड प्रधान, मिठाई गोंड प्रधान, संजीव गोंड और लक्ष्मण गोंड समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
