मौसम ने छीनी अन्नदाताओं की मुस्कान,बारिश और नम हवाओं ने रोकी कटाई
चंदौली। धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जनपद में किसानों पर कुदरत कहर बरपाने में तुले हैं।बेमौसम हो रही बारिश से अन्नदाताओं के चेहरे से मुस्कान गायब है।खेतों में लहलहाती गेहूं और अन्य फसलों को देखकर किसान प्रफुल्लित हो रहे थे।मंगलवार की रात से ही मौसम में अचानक बदलाव आया और नम हो गया। रात में ही बारिश भी हुई ।बुधवार की सुबह से ही मौसम करवट ले चुका है। किसानों के चेहरे पर पेशानी आ रही है।
चंदौली

10:57 AM, Apr 8, 2026
जनपद न्यूज टाइम्स डेस्क
जनपद न्यूज़ टाइम्सजे एन टी डेस्क
चंदौली। धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जनपद में किसानों पर कुदरत कहर बरपाने में तुले हैं।बेमौसम हो रही बारिश से अन्नदाताओं के चेहरे से मुस्कान गायब है। खेतों में लहलहाती गेहूं और अन्य फसलों को देखकर किसान प्रफुल्लित हो रहे थे। मंगलवार की रात से ही मौसम में अचानक बदलाव आया और नम हो गया। रात में ही बारिश भी हुई ।बुधवार की सुबह से ही मौसम करवट ले चुका है। किसानों के चेहरे पर पेशानी आ रही है। खेत और खलिहान दोनों जगह फसल रखी है।बदलते मौसम से फसलों को नुकसान हो रहा है। किसान खेतों में हैं।आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं।
कुदरत के कहर ने गेहूं किसानों की कमर तोड़ रही है। धान के कटोरे के रूप में विख्यात जनपद में बेमौसम बारिश, तेज हवा और वृष्टि के कारण खेतों में खड़ी पकी फसल जो कटने को तैयार थी आसमानी आफत के चलते जमीन पर बिछ रही है।इस तबाही से गेहूं का उत्पादन गिरने की आशंका है, जिससे अन्नदाता के सामने अब अपनी लागत निकालना भी बड़ी चुनौती बन सकती है।फसल गिरने से न केवल दाना पतला और काला पड़ सकता है। मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है और इस उतार-चढ़ाव ने जिले के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।कुछ दिन पहले हुई भारी बारिश और तेज हवाओं ने गेंहू की खेती को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया है। ज्यादातर किसानों की फसल खेतों में पूरी तरह गिर चुकी है. किसानों का कहना है कि फसल गिरने से पैदावार कमी आ सकती है. जो किसान इस बार बंपर पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे थे उनकी खुशियों पर अब ग्रहण लग गया है।
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किसानों का कहना है कि इस बार गेहूं की फसल बहुत अच्छी दिख रही थी।उन अचानक हुए मौसम बदलाव ने सब कुछ बिगाड़ दिया. फसल जमीन पर गिरने से गेहूं का दाना मोटा होने के बजाय पतला रह गया है और कई जगह दाना काला भी पड़ने की संभावना है। इससे न केवल अनाज कम निकलेगा।
