अम्बेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी, उनके योगदान पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में पूर्व सपा विधानसभा अध्यक्ष सुरेंद्र चौहान ने कहा कि डॉ. अंबेडकर आधुनिक भारत के निर्माणकर्ता और सामाजिक न्याय के सबसे बड़े प्रतीक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन दलितों, शोषितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। वे उन वर्गों की आवाज बने, जिन्हें सदियों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से वंचित रखा गया था।

6:44 PM, Apr 13, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्स
आधुनिक भारत के शिल्पकार और वंचितों के मसीहा थे डॉ. भीमराव अंबेडकर
शहाबगंज, चंदौली। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार को शहाबगंज ब्लॉक मुख्यालय स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्थल पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने आधुनिक भारत के निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में पूर्व सपा विधानसभा अध्यक्ष सुरेंद्र चौहान ने कहा कि डॉ. अंबेडकर आधुनिक भारत के निर्माणकर्ता और सामाजिक न्याय के सबसे बड़े प्रतीक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन दलितों, शोषितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। वे उन वर्गों की आवाज बने, जिन्हें सदियों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से वंचित रखा गया था।
आईपीएफ प्रवक्ता अजय राय ने कहा कि डॉ. अंबेडकर एक कुशल अर्थशास्त्री, विधिवेत्ता और राजनीतिक चिंतक थे। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश की आर्थिक नीतियों को दिशा दी।
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जनवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष साहब सिंह फौजी ने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही, जिसमें उन्होंने सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
राम सूचित दुबे ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने महिलाओं के अधिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किया। हिंदू कोड बिल के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को संपत्ति और विवाह संबंधी अधिकार दिलाने की पहल की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति का आकलन महिलाओं की स्थिति से किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने बताया कि जीवन के अंतिम चरण में वर्ष 1956 में डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ग्रहण किया, जो एक सामाजिक परिवर्तन का बड़ा संदेश था। उनके इस कदम से लाखों लोगों ने प्रेरित होकर बौद्ध धर्म अपनाया।
