गौशाला और बायोगैस प्लांट से गांव में रोजगार के नए अवसर: डीएम
निरीक्षण के दौरान किसान चन्द्र प्रकाश सिंह ने बताया कि उनकी गौशाला में लगभग 200 गायें हैं, जिनसे प्राप्त दूध की नियमित बिक्री की जाती है। साथ ही गौशाला परिसर में 350 क्यूबिक मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट के माध्यम से करीब 120–125 घरों में पाइपलाइन के जरिए गैस की आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों को मात्र लगभग 500 रुपये प्रतिमाह में नियमित बायोगैस उपलब्ध हो रही है, जो ए
चंदौली

6:51 PM, Apr 7, 2026
चंदौली। जनपद के पीडीडीयू नगर तहसील अंतर्गत ग्राम एकौनी में संचालित गौशाला और बायोगैस प्लांट का निरीक्षण जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग ने किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बेहतरीन पहल बताया।
निरीक्षण के दौरान किसान चन्द्र प्रकाश सिंह ने बताया कि उनकी गौशाला में लगभग 200 गायें हैं, जिनसे प्राप्त दूध की नियमित बिक्री की जाती है। साथ ही गौशाला परिसर में 350 क्यूबिक मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है। इस प्लांट के माध्यम से करीब 120–125 घरों में पाइपलाइन के जरिए गैस की आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीणों को मात्र लगभग 500 रुपये प्रतिमाह में नियमित बायोगैस उपलब्ध हो रही है, जो एलपीजी सिलेंडर की तुलना में काफी सस्ती है।
जिलाधिकारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गौशाला और बायोगैस प्लांट का यह मॉडल ग्रामीण आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस परियोजना के विस्तार के लिए किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाए तथा आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड) और उद्योग विभाग को निर्देशित किया कि पशुपालन और बायोगैस के क्षेत्र में विस्तार के लिए किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। साथ ही मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साईं को निर्देश दिया कि जनपद की अन्य गौशालाओं में भी इसी तरह के बायोगैस प्लांट लगाने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए।
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उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल ग्रामीणों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध हो रही है, बल्कि गोबर से ऑर्गेनिक खाद तैयार होने के कारण किसानों को बेहतर उर्वरक भी मिल रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति और फसलों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
किसान चन्द्रप्रकाश सिंह ने बताया कि गौशाला से प्रतिदिन लगभग 3000 किलो गोबर प्राप्त होता है, जिसका उपयोग बायोगैस और ऊर्जा उत्पादन में किया जा रहा है। इससे पहले यह गोबर बेकार चला जाता था। अब इस परियोजना से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
