लक्ष्मण रेखा रामजी प्रसाद " भैरव " ललित निबन्ध
बात यह है कि मेरे मन में लक्ष्मण रेखा शब्द को लेकर बात पैठ गयी । आखिर हमारे प्रधानमंत्री जी ने हमें अपने घरों में रोकने के लिए इन्हीं दो शब्दों का प्रयोग क्यों किया । कोई तो वजह होगी । सवा अरब आबादी वाले देश में लोगों के पैरों में अचानक से लक्ष्मण रेखा की बेड़ी पहना दी गयी । लोग थम गये , सिमट गये , रुक गए , सिकुड़ गए । छोटे छोटे कमरे उनकी दुनियाँ हो गयी । क्यों , आखिर क्या है लक्ष्मण रेखा । इस शब्द

रामजी प्रसाद "भैरव"
4:05 PM, Mar 8, 2026
रामजी प्रसाद "भैरव"
जनपद न्यूज़ टाइम्ससदी की सबसे बड़ी त्रासदी कोरोना महामारी के हम लोग साक्षी हैं । हमारे जीवन की रक्षा के लिए सरकार ने हमारे घर के सामने चेतावनी रूपी लक्ष्मण रेखा खींच दी । सुरक्षा की दृष्टि से हम अपने घर में रहें ।
बात यह है कि मेरे मन में लक्ष्मण रेखा शब्द को लेकर बात पैठ गयी । आखिर हमारे प्रधानमंत्री जी ने हमें अपने घरों में रोकने के लिए इन्हीं दो शब्दों का प्रयोग क्यों किया । कोई तो वजह होगी । सवा अरब आबादी वाले देश में लोगों के पैरों में अचानक से लक्ष्मण रेखा की बेड़ी पहना दी गयी । लोग थम गये , सिमट गये , रुक गए , सिकुड़ गए । छोटे छोटे कमरे उनकी दुनियाँ हो गयी । क्यों , आखिर क्या है लक्ष्मण रेखा । इस शब्द से लोग क्यों भयभीत हुए । क्या कुछ पूर्व में घटित हुआ था , जिसे लक्ष्य कर प्रधानमंत्री जी ने सांकेतिक चेतावनी दे डाली ।
हाँ , ऐसा ही था । भारत के मानस पटल पर युगों पूर्व यह घटना अंकित हो चुकी है । जिसे समय भी नहीं मिटा सकता । कहने को तो यह युगों पूर्व की घटना है । लेकिन लक्ष्मण रेखा एक कठोर चेतावनी है , जिसकी अवहेलना करने वाला , भयंकर दुःख भोगता है । याद कीजिये रामायण का वह प्रसंग , जिसमें श्री राम , माता सीता के आग्रह पर स्वर्ण मृग के पीछे दौड़ पड़े थे। जाते जाते सीता की सुरक्षा का दायित्व लक्ष्मण को सौंप गए । मृग के रूप एक मायावी राक्षस था । जो राम का बाण लगते ही , हाय लक्ष्मण , हाय सीते करने लगा । सीता जी को लगा उनके पति के साथ कुछ अनिष्ट घट गया है । इसलिए वह लक्ष्मण को ध्वनि के पीछे जाने की जिद करने लगी । लक्ष्मण उन्हें समझाते कि यह मायावी असुरों की कोई चाल हो सकती है । परन्तु हठ वश उन्होंने एक न सुनी , उल्टे लक्ष्मण जी को भला बुरा कहा । उनकी नीयत पर शक किया । थक हार कर लक्ष्मण जी ने कुटी के बाहर एक रेखा खींच दी , और सीता को उससे बाहर निकलने से मना कर दिया । रावण साधु वेश में आया और भिक्षा मांगने के बहाने , सीता को रेखा से बाहर आने के लिए बाध्य कर दिया , अंततः सीता का हरण कर लंका ले गया । यही से लक्ष्मण रेखा प्रसिद्ध हो गयी । कुछ इसे मर्यादा की रेखा मानते हैं तो कुछ लोग चेतावनी की , परन्तु हम इस पर बाद में बात करेंगे ।
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बात यह है कि जिस लक्ष्मण रेखा की इतनी ख्याति युगों युगों से चली आ रही है । वह मानव के लिए चेतावनी रेखा के रूप में प्रसिद्ध है , वास्तव में उसका स्रोत क्या है । इस बात पर कई विद्वानों ने अपना मत स्पष्ट किया है । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऋषि बाल्मीक द्वारा रचित रामायण ग्रन्थ , राम के जीवन काल में लिखी गयी । उसमें राम का स्वर्ण मृग के पीछे जाने का वर्णन मिलता है , लेकिन लक्ष्मण द्वारा सीता की सुरक्षा के लिए खींची गयी रेखा का जिक्र नहीं है । फिर यह बात आयी कहाँ से , और इस घटना की इतनी लोकप्रियता कैसे हुई । कुछ देर के लिए इस बात पर ध्यान जाता है कि सोलहवीं सदी में उत्तर भारत मे एक महान संत हुए तुलसी दास हुए , जिनके लिखे ग्रन्थ राम चरित मानस की लोक प्रियता की कोई सीमा नहीं है । यह उत्तर भारत के हर हिन्दू घर में बहुत श्रद्धा के साथ रखा और पढ़ा जाता है । विद्वानों ने उसे भी टटोला शायद यह प्रमाण वहाँ मिल जाये और लक्ष्मण रेखा का प्रमाण बन सके , लेकिन वहाँ भी बात नहीं बनी । रामचरित मानस में भी कोई प्रमाण नहीं है कि लक्ष्मण ने रेखा खींची थी । हरि अनन्त , हरि कथा अनन्ता । राम कथा अनेक भाषा और बोली में लिखी गयी । अलग अलग काल खंड और अलग अलग लोगों द्वारा लिखी गयी है । राम कथा का विस्तार अन्य धर्मों में भी मिलता है । इसके अलावा राम कथा इंडोनेशिया , मॉरीशस जैसे कई देशों में भारत जितना ही लोकप्रिय है । यहाँ बात हो रही थी , लक्ष्मण रेखा की । बारहवीं सदी में दक्षिण भारत में एक सन्त कंबन हुए तमिल भाषा के , उनके रामायण जिसे कम्ब रामायण के नाम से जाना जाता है । इसी ग्रन्थ में विद्वानों ने लक्ष्मण रेखा खोजी । बात यह है कि दक्षिण भारत के तमिल भाषा में लिखे इस प्रसंग का लोकप्रिय होने के क्या कारण हो सकते हैं जब कि कम्ब रामायण के कोई अन्य प्रसंग की चर्चा प्रायः नहीं के बराबर है । मुझे लगता है जिज्ञासुओं और सन्तों के प्रवचन से यह लोक प्रिय हुआ होगा । सच जो भी हो , पर लक्ष्मण रेखा को भारत के लोगों ने अपने घर की स्त्रियों के लिए मर्यादा की रेखा मान लिया । उन्होंने इस घटना को बड़ी गम्भीरता से लिया , हमारे यहाँ भारत में परिवार नामक संस्था की बड़ी पुरानी और दृढ़ परिकल्पना है । इसमें स्त्री को बड़ा मर्यादित स्वरूप दिया गया है । जब कि तत्कालीन समाज में स्त्रियों की बिगड़ती दशा पर राम द्वारा सुधार का कार्य शुरू हो चुका था । अहल्या उद्धार इस बात का उदाहरण है । राम का एक स्त्री का व्रत लेना तत्कालीन समाज के लिए प्रेरणा स्रोत था । उत्तर भारत में जहाँ स्त्री को पत्नी के रूप में वरण का चलन था । वहीं दक्षिण में स्वैचारिणी स्त्री सुपर्णखा का उल्लेख मिलता है । कभी कभी मुझे लगता है इस घटना के बाद ही भारतीय घरों में दहलीज या चौखट का चलन शुरू हुआ होगा । लोगों ने इसे लक्ष्मण रेखा के रूप में लिया । स्त्री के लिए दहलीज लांघना निषेध कर दिया गया ।
