सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अनुदेशकों के हक में बड़ी जीत— मंडल अध्यक्ष विकास यादव
शहाबगंज। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशकों को नियमित माने जाने और ₹17,000 मासिक मानदेय दिए जाने के फैसले से अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।इस ऐतिहासिक निर्णय को अनुदेशकों के लंबे संघर्ष की बड़ी जीत बताया जा रहा है।
चंदौली

5:51 PM, Feb 4, 2026
विनोद कुमार
जनपद न्यूज़ टाइम्सशहाबगंज। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुदेशकों को नियमित माने जाने और ₹17,000 मासिक मानदेय दिए जाने के फैसले से अनुदेशकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।इस ऐतिहासिक निर्णय को अनुदेशकों के लंबे संघर्ष की बड़ी जीत बताया जा रहा है।
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अनुदेशक संघ के वाराणसी मंडल अध्यक्ष विकास यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों की नौकरी अब समाप्त नहीं होगी।उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने स्पष्ट किया है कि संविदा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अनुदेशकों की सेवाएं स्वतः समाप्त नहीं की जा सकतीं।लगातार दस वर्षों से कार्य करने के कारण यह पद स्वतः सृजित माना जाएगा।अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष अभिनव सिंह ने कहा कि ₹17,000 मानदेय मिलने से अनुदेशक आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और नियमित माने जाने के बाद वे अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकेंगे।यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में वर्षों से कार्यरत अनुदेशकों को स्थायित्व और सम्मान प्रदान करेगा।गौरतलब है कि अनुदेशक वर्ष 2013 से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे।इस संबंध में दायर याचिका पर पहले हाईकोर्ट ने अनुदेशकों के पक्ष में फैसला सुनाया था।हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने भी अनुदेशकों के हक में फैसला सुनाकर सरकार की याचिका को खारिज कर दिया।क्षेत्र के अनुदेशकों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
